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  • केदारनाथ धाम में फिर जमकर हुई बर्फबारी, 7 जिलों के लिए अलर्ट जारी

    केदारनाथ धाम में फिर जमकर हुई बर्फबारी, 7 जिलों के लिए अलर्ट जारी

    अप्रैल माह की शुरुआत के साथ ही मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है. विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में बीती रात से लगातार बर्फबारी हो रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में फिर से बर्फ की मोटी चादर बिछ गई है. हाल ही में जिन रास्तों से बर्फ हटाई गई थी, वे एक बार फिर पूरी तरह बर्फ से ढक गए हैं. मंदिर परिसर भी पूरी तरह बर्फ से आच्छादित हो गया है. लगातार हो रही बर्फबारी से वहां चल रहे यात्रा तैयारियों के कार्य प्रभावित हो गए हैं. मजदूरों द्वारा की गई कड़ी मेहनत पर मौसम ने पानी फेर दिया है, जिससे व्यवस्थाओं को फिर से पटरी पर लाने की चुनौती सामने खड़ी हो गई है.

    बताया जा रहा है कि इस बार अप्रैल में भी मौसम सामान्य नहीं है और लगातार खराब बना हुआ है. ऐसे में आगामी 22 अप्रैल को प्रस्तावित कपाट खुलने की तिथि को देखते हुए प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की चिंताएं बढ़ गई हैं. बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सदस्य विनीत पोस्ती ने जानकारी देते हुए बताया कि धाम में बीती शाम से ही बर्फबारी जारी है. जिन स्थानों से बर्फ हटाई गई थी, वहां फिर से बर्फ जम गई है, जिससे व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं. उन्होंने कहा कि लगातार बर्फबारी के चलते यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से तैयार करने में कठिनाई आ रही है.

    यदि समय रहते व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो पाईं, तो तीर्थ यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने आगे बताया कि धाम में तैनात जवान न केवल सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं, बल्कि बर्फ हटाने के कार्य में भी जुटे हुए हैं. माइनस तापमान में काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण है, इसके बावजूद जवान पूरी निष्ठा और हौसले के साथ डटे हुए हैं.उन्होंने भरोसा जताया कि मौसम साफ होते ही व्यवस्थाओं को तेजी से दुरुस्त किया जाएगा, ताकि यात्रा सुचारू रूप से संचालित हो सके.

    उत्तराखंड में मौसम विभाग ने आज राज्य के उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपद में कहीं-कहीं गरज के साथ बारिश होने की संभावना जताई है. जबकि 3300 मीटर से उससे अधिक उत्तराखंड के शेष जनपदों के कुछ स्थानों में हल्की से मध्यम बारिश गरज व चमक के साथ हो सकती है. उत्तराखंड में मौसम विभाग ने उत्तराखंड के देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर व पिथौरागढ़ जनपदों में गरज के साथ बारिश होने का अंदेशा जताया है.

    ओलावृष्टि व झोंकेदार हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा) चलने की संभावना है. जिसके लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.उत्तराखंड राज्य के शेष जनपदों में कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने, झोंकेदार हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा से बढ़कर 60 तक) चलने का पूर्वानुमान जताया गया है. जिससे लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. बता दें कि 22 अप्रैल को वृष लग्न में बाबा केदारनाथ धाम के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ के लिए खोल दिए जाएंगे.

  • उत्तराखंड में आईपीएस अधिकारियों के तबादले, दो अफसर कुंभ मेले के लिए तैनात

    उत्तराखंड में आईपीएस अधिकारियों के तबादले, दो अफसर कुंभ मेले के लिए तैनात

    उत्तराखंड में IPS अधिकारियों के तबादले हुए हैं. शासन ने 4 IPS अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव किया है.यह आदेश 3 अप्रैल 2026 को देहरादून से जारी किया गया. जिसका उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाना तथा विभागीय कार्यप्रणाली में संतुलन स्थापित करना है.

    भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के तबादलों और नई तैनाती को लेकर आदेश जारी किया है. इन तबादलों में खास तौर पर आगामी कुंभ मेला को देखते हुए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. योगेन्द्र सिंह रावत को पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक/मुख्यालय) से हटाकर कुंभ मेला पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है.

    आयुष अग्रवाल को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी से हटाकर कुंभ मेला में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है. इन दोनों अधिकारियों पर कुंभ मेले के दौरान कानून-व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी जिम्मेदारी होगी. श्वेता चौबे को टिहरी का एसएसपी बनाया गया है.

    UTTARAKHAND POLICE TRANSFERS

    जारी सूची के अनुसार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अभिनव कुमार सिंह रावत को पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक) के पद से स्थानांतरित करते हुए अब उन्हें पुलिस महानिरीक्षक, कुमाऊं रेंज की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह बदलाव क्षेत्रीय पुलिसिंग को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कुमाऊं क्षेत्र में कानून-व्यवस्था से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे रहते हैं.

    इसी क्रम में अभिषेक अग्रवाल को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, टिहरी गढ़वाल के पद से हटाकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, उधम सिंह नगर बनाया गया है. उधम सिंह नगर जिला औद्योगिक और सीमा क्षेत्र होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे में वहां एक अनुभवी अधिकारी की तैनाती को सरकार का अहम कदम माना जा रहा है.

    वहीं अमित श्रीवास्तव को पुलिस अधीक्षक (अपराध एवं यातायात) से स्थानांतरित कर पुलिस अधीक्षक, टिहरी गढ़वाल की जिम्मेदारी दी गई है. टिहरी जनपद में पर्यटन, चारधाम यात्रा और भौगोलिक चुनौतियों के कारण पुलिस प्रशासन की भूमिका काफी अहम होती है. ऐसे में नए एसपी के रूप में उनकी नियुक्ति प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

    इसके अलावा पंकज भट्ट को पुलिस अधीक्षक, Crime Against Women/CB-CID से स्थानांतरित कर सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी), टिहरी गढ़वाल बनाया गया है. महिला अपराधों से जुड़े मामलों में उनके अनुभव को देखते हुए यह बदलाव विभागीय रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

    आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी अधिकारी अपने-अपने नए पदों पर तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण करेंगे. कार्यभार ग्रहण करने की सूचना पुलिस मुख्यालय के माध्यम से शासन को उपलब्ध कराएंगे. शासन ने यह भी निर्देश दिया है कि स्थानांतरण के दौरान किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए, इसके लिए संबंधित विभाग आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करें.

  • धामी सरकार ने फिर खोला दायित्वों का पिटारा, कई पार्टी नेताओं को दिया तोहफा

    धामी सरकार ने फिर खोला दायित्वों का पिटारा, कई पार्टी नेताओं को दिया तोहफा

    उत्तराखंड में धामी सरकार ने एक बार फिर पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए दायित्वों का पिटारा खोल दिया है. इस दौरान विभिन्न दायित्वों पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां दी गई है. खास बात ये है कि इसके लिए काफी समय से पार्टी कार्यकर्ता इंतजार कर रहे थे. आखिरकार कई पार्टी कार्यकर्ताओं को अप्रैल महीने की शुरुआत में दायित्वों का तोहफा मिल गया है.

    उत्तराखंड में हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद अब सरकार और संगठन स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को दायित्व देने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने विभिन्न बोर्ड, परिषदों और समितियों में पार्टी से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपनी शुरू कर दी हैं. इसके तहत कई पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अलग-अलग संस्थाओं में उपाध्यक्ष और अध्यक्ष जैसे पदों पर नामित किया गया है.

    दरअसल, राज्य में कैबिनेट विस्तार के बाद से ही ये चर्चा तेज थी कि सरकार जल्द ही पार्टी के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी समायोजित करेगी, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. इसी को देखते हुए अलग-अलग परिषदों और सलाहकार समितियों में नई नियुक्तियों की सूची जारी की गई है.

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम पार्टी संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अक्सर देखा जाता है कि सरकार बनने या कैबिनेट विस्तार के बाद संगठन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को बोर्ड, निगम और परिषदों में दायित्व देकर उन्हें भी जिम्मेदारी दी जाती है. इसी कड़ी में अब उत्तराखंड में भी कई नियुक्तियां की गई हैं.

    नई नियुक्तियों में विनोद सुयाल का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है. उन्हें उत्तराखंड राज्य युवा कल्याण सलाहकार परिषद (Uttarakhand State Youth Welfare Advisory Council) का उपाध्यक्ष नामित किया गया है. विनोद सुयाल भारतीय जनता पार्टी के पुराने और सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं और उनका संबंध टिहरी जिले से बताया जाता है.

    लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने के कारण उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है. इसी तरह नैनीताल निवासी ध्रुव रौतेला को मीडिया सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है. पार्टी के मीडिया और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें यह दायित्व सौंपा गया है.

    सरकार की ओर से जारी सूची में टिहरी गढ़वाल के खेम सिंह चौहान का नाम भी शामिल है. उन्हें उत्तराखंड राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद (Uttarakhand State Backward Classes Welfare Council) के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है. माना जा रहा है कि पिछड़े वर्ग से जुड़े मुद्दों और संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए यह दायित्व उन्हें दिया गया है.

    देहरादून निवासी चारु कोठारी को (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद) State Construction Movement Activists Honor Council के उपाध्यक्ष पद पर नामित किया गया है. यह परिषद राज्य आंदोलन से जुड़े आंदोलनकारियों के सम्मान और उनसे संबंधित मामलों पर काम करती है.

    इसके अलावा देहरादून के ही कुलदीप बुटोला को उत्तराखंड राज्य स्तरीय खेल परिषद (Uttarakhand State Level Sports Council) में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. खेल गतिविधियों और खिलाड़ियों से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए यह परिषद काम करती है.

    सरकार ने जड़ी-बूटी से जुड़े कार्यों और आयुर्वेदिक संसाधनों के विकास को देखते हुए हर्बल सलाहकार समिति (Herbal Advisory Committee) के उपाध्यक्ष पद पर सोना सजवाण को जिम्मेदारी दी है. उत्तराखंड में जड़ी-बूटी और औषधीय पौधों की प्रचुरता को देखते हुए यह समिति महत्वपूर्ण मानी जाती है.

    इसके साथ ही हरिप्रिया जोशी को उत्तराखंड राज्य महिला आयोग (Uttarakhand State Commission for Women) में उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है. महिला आयोग राज्य में महिलाओं से जुड़े मामलों, उनकी सुरक्षा और अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर काम करता है.

    राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो इन नियुक्तियों को पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है. लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने वाले नेताओं को इस तरह के दायित्व दिए जाने से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और उन्हें सरकार के साथ काम करने का अवसर भी मिलता है.

    दरअसल, कैबिनेट विस्तार के साथ ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार जल्द ही विभिन्न बोर्ड, निगम और परिषदों में नियुक्तियों की नई सूची जारी कर सकती है. इसी कारण कई पार्टी नेता और कार्यकर्ता भी अपने नाम इस सूची में शामिल होने की उम्मीद लगाए हुए थे.

    अब जब सरकार ने विभिन्न परिषदों और समितियों में कई नियुक्तियां कर दी हैं तो इसे उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि, माना जा रहा है कि आने वाले समय में और भी कई बोर्ड और निगमों में नियुक्तियां की जा सकती हैं, जिससे संगठन के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारी मिल सकती है.

  • भारत आ रहा है 46,000 टन LPG लेकर ‘ग्रीन साल्वी’, संकट के बीच रसोई गैस की किल्लत का डर खत्म

    भारत आ रहा है 46,000 टन LPG लेकर ‘ग्रीन साल्वी’, संकट के बीच रसोई गैस की किल्लत का डर खत्म

    पश्चिम एशिया में जारी भीषण भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से भारत आने वाला एक और एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन साल्वी’ सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पर आगे बढ़ गया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर गहरी चिंताएं बनी हुई हैं.

    सूत्रों के अनुसार, ‘ग्रीन साल्वी’ 46,000 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर भारत की ओर आ रहा है. विशेष बात यह है कि यह टैंकर अकेला नहीं है, बल्कि तीन भारतीय एलपीजी जहाजों के एक काफिले का नेतृत्व कर रहा है. 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय तनाव के बीच, यह सातवां अवसर है जब कोई भारतीय पोत इस खतरनाक चोकपॉइंट को पार करने में सफल रहा है.

    इस सुरक्षित मार्ग के पीछे भारत की सक्रिय ‘ऊर्जा कूटनीति’ का बड़ा हाथ माना जा रहा है. तेहरान और नई दिल्ली के बीच उच्च स्तरीय राजनयिक वार्ताओं के बाद, ईरान ने इन जहाजों को “मित्र राष्ट्र” के पोत के रूप में मान्यता दी है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने इन जहाजों के पारगमन की सुविधा प्रदान की है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रमाण है.

    टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘ग्रीन साल्वी’ और उसके साथ चल रहे अन्य जहाज ओमान के तट के करीब ‘दक्षिणी मार्ग’ का उपयोग कर रहे हैं. सामान्य तौर पर जहाज उत्तरी लेन का उपयोग करते हैं, जो ईरानी नियंत्रण के अधिक करीब होती है. वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, दक्षिणी मार्ग को अधिक सुरक्षित माना जा रहा है, जिससे किसी भी संभावित टकराव या अप्रिय घटना से बचा जा सके.

    भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. ‘ग्रीन साल्वी’ की सफल यात्रा से घरेलू बाजार में रसोई गैस की आपूर्ति को स्थिरता मिलेगी. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आपूर्ति बाधित होती, तो घरेलू स्तर पर कीमतों में उछाल और किल्लत की स्थिति पैदा हो सकती थी.

    पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने में सफलता पाई है. अगले कुछ घंटों में दो और भारतीय एलपीजी वाहकों के इस जलडमरूमध्य को पार करने की उम्मीद है.

  • ‘मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना’, पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का अपनी ही पार्टी पर बड़ा हमला

    ‘मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना’, पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का अपनी ही पार्टी पर बड़ा हमला

    आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी द्वारा राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए जाने के बाद अब इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया है. पद से हटने के बाद अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर अपनी ही पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए हैं और एक शायराना अंदाज में चेतावनी भी दी है.

    संसद भवन के बाहर से रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में राघव चड्ढा काफी आक्रामक और भावुक नजर आ रहे हैं. उन्होंने अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहा, “मुझे जब-जब संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं जनता के मुद्दे उठाता हूं. मैंने हवाई अड्डों पर महंगे खाने, जोमैटो-ब्लिंकिट के डिलीवरी राइडर्स की समस्याओं, टोल प्लाजा की लूट और मिडिल क्लास पर टैक्स के बोझ जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है.” चड्ढा ने आगे तीखे स्वर में पूछा कि क्या इन जनहित के मुद्दों पर बात करना कोई गुनाह है? उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर उनके बोलने पर रोक लगाने की सिफारिश की है, जो बेहद हैरान करने वाला है.

    अपनी ही पार्टी के खिलाफ खोला मोर्चा राघव चड्ढा ने वीडियो में स्पष्ट किया कि पार्टी ने राज्यसभा को सूचित किया है कि उन्हें अब सदन में बोलने का मौका न दिया जाए. उन्होंने सवाल किया कि आखिर पार्टी उनकी आवाज को क्यों दबाना चाहती है? चड्ढा ने कहा, “भला कोई मेरे बोलने पर रोक क्यों लगाना चाहेगा? मेरी आवाज को खामोश करने से आम आदमी पार्टी का क्या फायदा है?” वीडियो के अंत में राघव चड्ढा ने एक शेर के जरिए अपनी भावी रणनीति और इरादों को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना, मैं वो दरिया हूँ जो वक्त आने पर सैलाब बनता है.”

  • मुस्लिम कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ‘मुतवल्ली नहीं, सज्जादानशीन होता है आध्यात्मिक प्रमुख’

    मुस्लिम कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ‘मुतवल्ली नहीं, सज्जादानशीन होता है आध्यात्मिक प्रमुख’

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि “सज्जादानशीन” वक्फ का आध्यात्मिक प्रमुख होता है और “सज्जादानशीन” की नियुक्ति एक धार्मिक मामला है, जबकि वक्फ के “मुतवल्ली” की भूमिका केवल वक्फ के प्रशासन और प्रबंधन से संबंधित होती है.

    सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि “मोहम्मदन कानून (चौथा संस्करण)” की रूपरेखा के अनुसार, सज्जादानशीन के पद की विशेषता यह है कि मूल संस्थापक को उत्तराधिकारी नियुक्त करने का अधिकार है, जिसे बदले में वही अधिकार प्राप्त होता है, और अधिकांश मामलों में, सज्जादानशीन का पद वंशानुगत हो जाता है.

    न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और विपुल एम पंचोली की पीठ ने 2 अप्रैल को दिए गए 90 पृष्ठ के फैसले में कहा कि मुतवल्ली और सज्जादानशीन के पदों को एक समान नहीं माना जा सकता. पीठ ने कहा कि वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 32(2)(जी) के तहत नियुक्त सज्जादानशीन, वक्फ के मुतवल्ली का कार्यभार भी संभाल सकते हैं. हालांकि, धारा 32(2)(जी) के तहत नियुक्त मुतवल्ली, सज्जादानशीन के रूप में कार्य नहीं कर सकते, बल्कि अधिनियम और नियमों में निर्धारित कर्तव्यों का ही निर्वहन कर सकते हैं.

    पीठ ने कहा, “सज्जादानशीन वक्फ के आध्यात्मिक प्रमुख होते हैं और सज्जादानशीन की नियुक्ति एक धार्मिक मामला है. हालांकि, वक्फ के मुतवल्ली की भूमिका केवल वक्फ के प्रशासन और प्रबंधन से संबंधित होती है.”

    पीठ ने इस बात की जांच की कि क्या मुतवल्ली और सज्जादानशीन के पद एक ही हैं. पीठ ने गौर किया कि प्रारंभ में यह बताना भी प्रासंगिक है कि 1995 के अधिनियम में सज्जादानशीन शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है, हालांकि नियमों में इसे इस प्रकार परिभाषित किया गया है. सज्जादानशीन का अर्थ है दरगाह का आध्यात्मिक प्रमुख और उस दरगाह के आध्यात्मिक मामलों का प्रभारी.

    पीठ ने पाया कि मुतवल्ली के कार्य विशुद्ध रूप से प्रशासनिक हैं और मुतवल्ली का पद आध्यात्मिक पद नहीं है. पीठ ने गौर किया कि यह स्पष्ट है कि किसी व्यक्ति को मुतवल्ली के पद से हटाने से वक्फ संपत्ति के संबंध में लाभार्थी या किसी अन्य हैसियत से उसके व्यक्तिगत अधिकारों या सज्जादानशीन के रूप में उसके किसी भी अधिकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

    बेंच ने कहा, “वर्तमान मामले में मुद्दा मुतवल्ली की नियुक्ति से नहीं, बल्कि विवादित दरगाह के सज्जादानशीन की नियुक्ति से संबंधित है. अतः, इस मामले में सिविल न्यायालय को निर्णय लेने का अधिकार है.” पीठ ने कहा कि उसका मानना ​​है कि हाईकोर्ट ने यह निष्कर्ष निकालकर गंभीर त्रुटि की है कि निचली अदालत और प्रथम अपीलीय न्यायालय विवादित दरगाह के सज्जादानशीन के पद से संबंधित मामले पर अधिकार क्षेत्र ग्रहण करने और निर्णय लेने में उचित नहीं थे और इस मामले का निपटारा और निर्णय संबंधित वक्फ बोर्ड द्वारा किया जाना चाहिए.

    कोर्ट ने कहा, “अत: उपरोक्त चर्चा के आलोक में, हमारा मत है कि सिविल न्यायालय को इस मामले में विवाद पर सुनवाई करने का अधिकार है और इसलिए, निचली अदालत ने इस मामले में विवाद का निर्णय करते समय कोई त्रुटि नहीं की है.”

    पीठ ने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि “मोहम्मदन कानून (चौथा संस्करण)” की रूपरेखा के अनुसार, सज्जादानशीन के पद की विशेषता यह है कि मूल संस्थापक को अपने उत्तराधिकारी को मनोनीत करने का अधिकार है, और उत्तराधिकारी को भी यही अधिकार प्राप्त होता है. पीठ ने आगे कहा कि यह भी स्पष्ट है कि अधिकांश मामलों में, सज्जादानशीन का पद वंशानुगत हो जाता है.

    सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की, “मुल्ला ने अपने “मोहम्मदन कानून के सिद्धांत” (13वां संस्करण) में सज्जादानशीन शब्द का वर्णन करते हुए कहा है कि सज्जादानशीन का दर्जा मुतवल्ली से ऊंचा होता है. वह संस्था का प्रमुख होता है और उसे मुतवल्ली के प्रबंधन पर निगरानी रखने का अधिकार होता है. लेकिन सज्जादानशीन मुतवल्ली भी हो सकता है, और उस स्थिति में वक्फ संपत्ति के संदर्भ में, उसकी स्थिति मुतवल्ली से बेहतर नहीं होती.”

    सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा याचिकाकर्ता के पक्ष में पारित फैसले और प्रथम अपीलीय न्यायालय द्वारा पारित आदेशों को रद्द करने में गंभीर त्रुटि की है, क्योंकि दीवानी न्यायालय को इस मामले में विवाद पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं है. उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए आदेश को अमान्य घोषित कर दिया था कि ये आदेश अमान्य हैं.

    पीठ ने कहा कि भारतीय न्यायालयों ने लगातार यह माना है कि ऐसे धार्मिक पदों का उत्तराधिकार सामान्यतः रीति-रिवाजों, प्रथा या पदधारी द्वारा नामांकन के आधार पर निर्धारित होता है, जो संस्था की विशिष्ट परंपराओं पर निर्भर करता है.

    पीठ ने कहा, “मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं के संदर्भ में, सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्वीकार किया है कि सज्जादानशीन या मुतवल्ली जैसे पद संस्था की स्थापित परंपराओं के अनुसार हस्तांतरित हो सकते हैं, जिसमें पूर्ववर्ती द्वारा नामांकन भी शामिल है, न कि उत्तराधिकार के सख्त नियमों के अनुसार.”

    सर्वोच्च न्यायालय ने सैयद मोहम्मद आदिल पाशा कादरी उर्फ ​​सैयद बुदन शाह कादरी द्वारा कर्नाटक हाईकोर्ट के 16 अप्रैल, 2024 के फैसले के खिलाफ दायर अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए ये टिप्पणियां कीं.

    उच्च न्यायालय ने माना था कि अधिसूचित वक्फ संस्था के सज्जादानशीन के पद से संबंधित विवाद पर निर्णय लेने का अधिकार सिविल न्यायालय के पास नहीं है, क्योंकि वक्फ अधिनियम के प्रावधानों के तहत यह अधिकार वैधानिक रूप से और विशेष रूप से वक्फ बोर्ड के लिए आरक्षित है.

    विवाद रामनगर जिले के चन्नापटना में स्थित हजरत अखिल शाह कादरी दरगाह, जिसे लोकप्रिय रूप से “बड़ा मकान” कहा जाता है, के सज्जादानशीन के आध्यात्मिक और वंशानुगत पद के अधिकार से संबंधित था.

    सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय ने मामले का गुण-दोष के आधार पर निर्णय नहीं लिया है. न्यायालय ने कहा, “हम मामले को उच्च न्यायालय को वापस भेजते हैं ताकि वह इस अपील में हमारे द्वारा लिए गए अधिकार-दोष के मुद्दे को छोड़कर, कानून के अनुसार पक्षों के मामले का गुण-दोष के आधार पर निर्णय ले. चूंकि पक्षों के बीच विवाद 1988 से लंबित है, इसलिए हम उच्च न्यायालय से सुनवाई में तेजी लाने और मामले का जल्द से जल्द, अधिमानतः 9 महीनों के भीतर, निपटारा करने का अनुरोध करते हैं.” इससे ही संबंधित एक अन्य मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 2008 के उस फैसले के विरुद्ध दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें समवर्ती निर्णयों और आदेशों की पुष्टि करते हुए सैयद मोहम्मद आदिल पाशा खदरी को कर्नाटक के चामराजनगर जिले में स्थित हजरत मर्दान-ए-गैब दरगाह, शिवसमुद्रम का वैध सज्जादानशीन घोषित किया गया था.

  • महाराष्ट्र: नासिक में भयानक हादसा, कुएं में गिरी कार, 6 छात्रों समेत 9 की मौत

    महाराष्ट्र: नासिक में भयानक हादसा, कुएं में गिरी कार, 6 छात्रों समेत 9 की मौत

    महाराष्ट्र में नासिक के डिंडोरी तालुका के शिवाजीनगर इलाके में एक भयानक हादसे की खबर सामने आई है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह हादसा शुक्रवार देर रात (3 अप्रैल) को हुआ जब एक कार कुएं में गिर गई.

    इस हादसे में छह स्टूडेंट्स समेत नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. हादसे की सही वजह अभी पता नहीं चल पाई है. सोशल गैदरिंग से लौटते समय हुआ हादसा. खबरों के मुताबिक, नासिक जिले के डिंडोरी तालुका के शिवाजीनगर इलाके में राज बैंक्वेट हॉल और वेडिंग वेन्यू में शुक्रवार शाम को एक प्राइवेट कोचिंग क्लास के लिए सोशल गैदरिंग रखी गई थी.

    इस इवेंट में शहर के साथ-साथ आस-पास के गांवों से भी बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स और पेरेंट्स शामिल हुए थे. रात करीब 10:00 बजे, गैदरिंग खत्म होने के बाद डिंडोरी का दरगोड़े परिवार अर्टिगा कार से घर के लिए निकला. उनके सफर के दौरान एक भयानक हादसा हुआ जब कार वेडिंग वेन्यू के पास बने एक खेत के कुएं में गिर गई.

    डिंडोरी के शिवाजीनगर इलाके में एक प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट ने एक सामाजिक समारोह का आयोजन किया था. इंदौर गांव का दरगोड़े परिवार भी इसमें शामिल हुआ था. कार्यक्रम खत्म होने के बाद उनकी कार एक मैरिज हॉल के बगल में स्थित कुएं में गिर गई. इस घटना में छह स्टूडेंट्स समेत नौ लोगों की मौत हो गई. देर रात क्रेन की मदद से कार को निकाल लिया गया. आज सुबह शवों का पोस्टमार्टम किया जाएगा. यह जानकारी डिंडोरी पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर भगवान मथुरे ने दी.

  • प्रधानमंत्री मोदी ने पुडुचेरी में रोड शो किया, राजग को वोट देने की अपील की

    प्रधानमंत्री मोदी ने पुडुचेरी में रोड शो किया, राजग को वोट देने की अपील की

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यहां एक भव्य रोड शो करते हुए नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में एआईएनआरसी-भाजपा गठबंधन को वोट देने की अपील की.

    प्रधानमंत्री ने एआईएनआरसी के संस्थापक नेता और मुख्यमंत्री एन. रंगासामी और भाजपा नेता व गृह मंत्री ए. नमसिवायम के साथ अजंता सिग्नल पॉइंट से दो किलोमीटर से कम दूरी पर स्थित कामराजर स्टैच्यू/राजा थिएटर सिग्नल तक रोडशो किया. पूरा कार्यक्रम लगभग एक घंटे तक चला.

    रोड शो के लिए प्रधानमंत्री के पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाकर मोदी का जोरदार स्वागत किया. प्रधानमंत्री ने अपना खुला वाहन धीरे-धीरे आगे बढ़ने पर लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया. इस दौरान लोगों ने उनके वाहन पर फूल बरसाए.

    शहर के विभिन्न हिस्सों विशेषकर रोड शो के प्रमुख बिंदु एसवी पटेल रोड और समाप्ति स्थल अन्नासलाई–कामराजर सलाई जंक्शन तक भाजपा-एआईएनआरसी के झंडे लहराते रहे. प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी.

    सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों ने पुडुचेरी में प्रधानमंत्री के रोड शो को रंगारंग और उत्साहपूर्ण बना दिया. इससे पहले, प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में उनके समर्थक जुटे.

    पिछले महीने केंद्र शासित प्रदेश के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने 2,700 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन किया था. सत्तारूढ़ ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी) और भाजपा क्रमशः 16 और 10 सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं. राजग के घटक दल अन्नाद्रमुक और लाचिय्या जननायग काची को 2-2 सीट दी गई हैं.

  • मोदी, हिमंत ने आदिवासियों के विकास के लिए रोडमैप तैयार किया : अमित शाह

    मोदी, हिमंत ने आदिवासियों के विकास के लिए रोडमैप तैयार किया : अमित शाह

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने आदिवासियों के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार किया है. उन्होंने इस रोडमैप को लागू करने के लिए मतदाताओं से राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करने का आग्रह किया.

    ग्वालपाड़ा जिले के दुधनोई में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस ने कभी किसी आदिवासी महिला को राष्ट्रपति नहीं बनाया, लेकिन मोदी ने इस चलन को बदल दिया और द्रौपदी मुर्मू भारत की राष्ट्रपति बनीं.

    उन्होंने कहा, “केंद्र में प्रधानमंत्री और यहां असम में मुख्यमंत्री के पास राज्य में आदिवासियों के विकास के लिए एक रोडमैप है. अगर लोग भाजपा को लगातार तीसरी बार जनादेश देते हैं, तो इसे (रोडमैप) आगे बढ़ाया जाएगा.”

    कामरूप जिले के पलाशबाड़ी में एक रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष के भारत के दुश्मन देश से संबंध होने के आरोप हैं. उन्होंने कहा, “लेकिन वह इस बारे में चुप्पी साधे हुए हैं.”

    शाह ने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई और उनकी पत्नी के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध होने के हिमंत के आरोपों की पृष्ठभूमि में यह टिप्पणी की. हालांकि, उन्होंने न तो गोगोई का नाम लिया और न ही दुश्मन देश की पहचान पाकिस्तान के रूप में की.

    गृह मंत्री ने कांग्रेस पर पलाशबाड़ी में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की स्थापना के लिए लाए गए विधेयक को रोकने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि वह भाजपा ही थी, जिसने राज्य में आईआईएम की स्थापना सुनिश्चित की.

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता “जितना चाहें हमारा विरोध कर सकते हैं, लेकिन वह इसे (आईआईएम) स्थापित होने से नहीं रोक सकते.”

    गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा पलाशबाड़ी को शिक्षा का केंद्र बनाना चाहती है. उन्होंने कहा कि राज्य के लिए भाजपा की नीति ‘अप्रोच असम, एस्पायर असम और इंस्पायर असम’ है.

    दुधनोई में शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी आदिवासी कल्याण की बात नहीं की. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से कांग्रेस की सरकारों ने आदिवासियों के विकास पर केवल 25,000 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 11 वर्षों में उनके लिए 1.38 लाख करोड़ रुपये दिए.

    गृह मंत्री ने ग्वालपाड़ा को ‘मिनी असम’ करार दिया, क्योंकि वहां राभा, बोडो, हाजोंग और कोच सहित कई जनजातियों के लोगों के अलावा आदिवासी चाय बागान श्रमिक रहते हैं। उन्होंने दावा किया कि केवल भाजपा ही इन लोगों का विकास सुनिश्चित कर सकती है.

    शाह ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के दायरे में नहीं आएंगे.

    उन्होंने कहा, “कांग्रेस आदिवासियों को डराने के लिए अफवाहें फैला रही है कि वे यूसीसी से प्रभावित होंगे, लेकिन यह सरासर झूठ है और कोई भी आदिवासी इसके दायरे में नहीं आएगा.”

    पलाशबाड़ी में शाह ने कहा कि यूसीसी यह सुनिश्चित करेगा कि किसी को भी चार बार शादी करने की अनुमति न मिले.

    गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ही वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने आदिवासियों की कला, संस्कृति, भोजन, वस्त्र, संगीत और नृत्य को वैश्विक मंच पर पहुंचाया।

    उन्होंने कहा, “हर आदिवासी परिवार को एक गाय और एक भैंस दी जाएगी। मैं सहकारिता मंत्री के रूप में इसे सुनिश्चित करूंगा.”

    शाह ने आरोप लगाया, “नेहरू-गांधी परिवार ने कभी असम के कल्याण के बारे में नहीं सोचा. 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान (जवाहरलाल) नेहरू ने असम को ‘टाटा, बाय-बाय’ कह दिया… लेकिन भाजपा किसी को भी एक इंच जमीन नहीं हड़पने देगी.”

    असम से सटी मेघालय की गारो पहाड़ियों में हाल ही में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि घुसपैठियों ने आदिवासी महिलाओं से शादी करके गारो परिषद में सत्ता हथियाने की कोशिश की और इसी वजह से यह संघर्ष शुरू हुआ.

    गृह मंत्री ने कांग्रेस पर असम को घुसपैठियों का “अड्डा” बनाने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा सरकार ने उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

    शाह ने कहा, “हमें असम में पांच साल और सरकार चलाने का मौका दीजिए। हम प्रत्येक घुसपैठिये की पहचान कर उन्हें वापस भेजेंगे और राज्य को उनसे मुक्त कराएंगे.”

    उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध प्रवासी गरीबों की जमीन, पूजा स्थल, अनाज और युवाओं के रोजगार के अवसर छीन रहे हैं.

    शाह ने दावा किया कि भाजपा ने अतिक्रमणकारियों के कब्जे से 1.50 लाख एकड़ जमीन मुक्त कराई है. उन्होंने रैली में मौजूद लोगों से भाजपा को फिर से चुनाव जिताने का आग्रह किया और कहा कि “हम घुसपैठियों को वापस भेजने का काम पूरा करेंगे।”

    गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा ने 2019 से कई समझौतों पर हस्ताक्षर करके असम में शांति बहाल की और 10,000 से अधिक युवाओं का आत्मसमर्पण कराने के बाद उन्हें मुख्यधारा में लेकर आई।

    शाह ने आरोप लगाया कि वह जब भी असम आंदोलन के दिनों से राज्य में व्याप्त अशांति के बारे में बात करते हैं, तो “राहुल बाबा (राहुल गांधी) कहते हैं कि मैं अतीत की बात क्यों करता हूं।”

    उन्होंने कहा, “हमें कांग्रेस की ओर से अतीत में की गई गलतियों को याद रखना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें दोहराया न जाए.”

    शाह ने कहा कि अगर कांग्रेस नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में एक भी सीट जीतती है, तो पूर्वोत्तर राज्य को एक बार फिर अस्थिरता का सामना करना पड़ेगा.

    गृह मंत्री ने असम में भाजपा की ओर से शुरू की गई कई विकास परियोजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कांग्रेस राज्य की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए इस पैमाने की पहल करने की कल्पना भी नहीं कर सकती.

    उन्होंने कहा, “‘पंजे’ (कांग्रेस का चुनाव चिह्न) पर एक भी वोट बर्बाद न करें। ‘कमल’ (भाजपा का चुनाव चिह्न) के पक्ष में वोट डालें.”

    शाह ने कहा कि उनके हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके कारण उन्हें ग्वालपाड़ा और दुधनोई तक सड़क मार्ग से आना पड़ा, जिस दौरान रास्ते में उन्होंने असम की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव किया।

    गृह मंत्री को शुक्रवार को असम में तीन चुनावी रैलियों को संबोधित करना था. हालांकि, हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी के कारण धुबरी जिले के गोलकगंज में निर्धारित उनकी पहली रैली रद्द करनी पड़ी.

    दुधनोई में शाह ने ग्वालपाड़ा वेस्ट (सुरक्षित) से भाजपा उम्मीदवार पबित्रा राभा और दुधनोई (सुरक्षित) से पार्टी प्रत्याशी टंकेश्वर राभा के लिए प्रचार किया। वहीं, पलाशबाड़ी में उन्होंने पार्टी उम्मीदवार हिमांगशु बैश्य (पलाशबाड़ी) और राजू मेच (बोको-चायगांव) के पक्ष में मतदान की अपील की.

    असम की 126 विधानसभा सीट के चुनाव के लिए मतदान नौ अप्रैल को होगा, जबकि मतों की गिनती चार मई को की जाएगी.

  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: भाजपा ने जारी की 27 उम्मीदवारों की सूची, अन्नामलाई का नाम गायब

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: भाजपा ने जारी की 27 उम्मीदवारों की सूची, अन्नामलाई का नाम गायब

    भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए आधिकारिक अपने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. खास बात यह है कि पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के.अन्नामलाई का नाम इस सूची में नहीं है. अन्नामलाई ने कथित तौर पर अपनी सहयोगी एआईएडीएमके द्वारा पार्टी को दिए गए चुनाव क्षेत्रों से नाखुशी जताने के बाद चुनाव लड़ने से मना कर दिया.

    अन्नामलाई को बाहर रखने के बावजूद, भाजपा ने खास इलाकों में अपने प्रचार अभियान को आगे बढ़ाने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व राज्यपाल को मैदान में उतारा है.

    सबसे अहम नामों में केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन का नाम शामिल है. इन्हें अवनाशी सीट से उम्मीदवार बनाया गया है, जो पार्टी के प्रमुख दलित चेहरों में गिने जाते हैं. वहीं पूर्व राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन को मायलापुर से उम्मीदवार बनाया गया है.

    मौजूदा विधायक और महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष, वनथी श्रीनिवासन, अपनी पिछली कोयंबटूर दक्षिण सीट छोड़कर कोयंबटूर (उत्तर) से चुनाव लड़ेंगी.

    सूची में शामिल अन्य उम्मीदवारों के नाम इस प्रकार हैं

    • 6 अवाडी – एम. राजसिम्हा महिंद्रा (एम. अश्विनकुमार)
    • 25 मायलापुर – डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन
    • 56 थल्ली – डॉ. नागेश कुमार
    • 63 तिरुवन्नामलाई – सी. एलुमलाई
    • 92 रासिपुरम (SC) – डॉ. एस.डी. प्रेमकुमार
    • 100 मोडकुरिची – कीर्तिका शिवकुमार
    • 108 उधगमंडलम – भोजराजन
    • 114 तिरुप्पुर (दक्षिण) – एस. थंगराज
    • 168 तिरुवारुर – गोवी चंद्रु
    • 174 तंजावुर – एम. मुरुगानंदम
    • 178 गांधारवकोट्टई (SC) – सी. उदयकुमार
    • 180 पुदुकोट्टई – एन. रामचंद्रन
    • 183 अरंथंगी – कविता श्रीकांत
    • 185 तिरुपत्तूर – के.सी. थिरुमारन
    • 187 मनामदुरई (SC) – पोन वी. बलागणपति
    • 192 मदुरै दक्षिण – प्रो. पी. राम श्रीनिवासन
    • 204 सत्तूर – नैनार नागेन्द्रन
    • 211 रामनाथपुरम – जीबीएस के. नागेन्द्रन
    • 215 तिरुचेंदूर – केआरएम राधाकृष्णन
    • 220 वासुदेवनल्लूर (SC) – अनंतन अय्यासामी
    • 228 राधापुरम – एस.पी. बालकृष्णन
    • 230 नागरकोइल – एम.आर. गांधी
    • 231 कोलाचेल – टी. शिवकुमार
    • 232 पद्मनाभपुरम – पी. रमेश
    • 233 विलावनकोड – एस. विजायदभारणी