मोदी, हिमंत ने आदिवासियों के विकास के लिए रोडमैप तैयार किया : अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने आदिवासियों के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार किया है. उन्होंने इस रोडमैप को लागू करने के लिए मतदाताओं से राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करने का आग्रह किया.
ग्वालपाड़ा जिले के दुधनोई में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस ने कभी किसी आदिवासी महिला को राष्ट्रपति नहीं बनाया, लेकिन मोदी ने इस चलन को बदल दिया और द्रौपदी मुर्मू भारत की राष्ट्रपति बनीं.
उन्होंने कहा, “केंद्र में प्रधानमंत्री और यहां असम में मुख्यमंत्री के पास राज्य में आदिवासियों के विकास के लिए एक रोडमैप है. अगर लोग भाजपा को लगातार तीसरी बार जनादेश देते हैं, तो इसे (रोडमैप) आगे बढ़ाया जाएगा.”
कामरूप जिले के पलाशबाड़ी में एक रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष के भारत के दुश्मन देश से संबंध होने के आरोप हैं. उन्होंने कहा, “लेकिन वह इस बारे में चुप्पी साधे हुए हैं.”
शाह ने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई और उनकी पत्नी के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध होने के हिमंत के आरोपों की पृष्ठभूमि में यह टिप्पणी की. हालांकि, उन्होंने न तो गोगोई का नाम लिया और न ही दुश्मन देश की पहचान पाकिस्तान के रूप में की.
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर पलाशबाड़ी में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की स्थापना के लिए लाए गए विधेयक को रोकने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि वह भाजपा ही थी, जिसने राज्य में आईआईएम की स्थापना सुनिश्चित की.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता “जितना चाहें हमारा विरोध कर सकते हैं, लेकिन वह इसे (आईआईएम) स्थापित होने से नहीं रोक सकते.”
गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा पलाशबाड़ी को शिक्षा का केंद्र बनाना चाहती है. उन्होंने कहा कि राज्य के लिए भाजपा की नीति ‘अप्रोच असम, एस्पायर असम और इंस्पायर असम’ है.
दुधनोई में शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी आदिवासी कल्याण की बात नहीं की. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से कांग्रेस की सरकारों ने आदिवासियों के विकास पर केवल 25,000 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 11 वर्षों में उनके लिए 1.38 लाख करोड़ रुपये दिए.
गृह मंत्री ने ग्वालपाड़ा को ‘मिनी असम’ करार दिया, क्योंकि वहां राभा, बोडो, हाजोंग और कोच सहित कई जनजातियों के लोगों के अलावा आदिवासी चाय बागान श्रमिक रहते हैं। उन्होंने दावा किया कि केवल भाजपा ही इन लोगों का विकास सुनिश्चित कर सकती है.
शाह ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के दायरे में नहीं आएंगे.
उन्होंने कहा, “कांग्रेस आदिवासियों को डराने के लिए अफवाहें फैला रही है कि वे यूसीसी से प्रभावित होंगे, लेकिन यह सरासर झूठ है और कोई भी आदिवासी इसके दायरे में नहीं आएगा.”
पलाशबाड़ी में शाह ने कहा कि यूसीसी यह सुनिश्चित करेगा कि किसी को भी चार बार शादी करने की अनुमति न मिले.
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ही वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने आदिवासियों की कला, संस्कृति, भोजन, वस्त्र, संगीत और नृत्य को वैश्विक मंच पर पहुंचाया।
उन्होंने कहा, “हर आदिवासी परिवार को एक गाय और एक भैंस दी जाएगी। मैं सहकारिता मंत्री के रूप में इसे सुनिश्चित करूंगा.”
शाह ने आरोप लगाया, “नेहरू-गांधी परिवार ने कभी असम के कल्याण के बारे में नहीं सोचा. 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान (जवाहरलाल) नेहरू ने असम को ‘टाटा, बाय-बाय’ कह दिया… लेकिन भाजपा किसी को भी एक इंच जमीन नहीं हड़पने देगी.”
असम से सटी मेघालय की गारो पहाड़ियों में हाल ही में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि घुसपैठियों ने आदिवासी महिलाओं से शादी करके गारो परिषद में सत्ता हथियाने की कोशिश की और इसी वजह से यह संघर्ष शुरू हुआ.
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर असम को घुसपैठियों का “अड्डा” बनाने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा सरकार ने उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
शाह ने कहा, “हमें असम में पांच साल और सरकार चलाने का मौका दीजिए। हम प्रत्येक घुसपैठिये की पहचान कर उन्हें वापस भेजेंगे और राज्य को उनसे मुक्त कराएंगे.”
उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध प्रवासी गरीबों की जमीन, पूजा स्थल, अनाज और युवाओं के रोजगार के अवसर छीन रहे हैं.
शाह ने दावा किया कि भाजपा ने अतिक्रमणकारियों के कब्जे से 1.50 लाख एकड़ जमीन मुक्त कराई है. उन्होंने रैली में मौजूद लोगों से भाजपा को फिर से चुनाव जिताने का आग्रह किया और कहा कि “हम घुसपैठियों को वापस भेजने का काम पूरा करेंगे।”
गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा ने 2019 से कई समझौतों पर हस्ताक्षर करके असम में शांति बहाल की और 10,000 से अधिक युवाओं का आत्मसमर्पण कराने के बाद उन्हें मुख्यधारा में लेकर आई।
शाह ने आरोप लगाया कि वह जब भी असम आंदोलन के दिनों से राज्य में व्याप्त अशांति के बारे में बात करते हैं, तो “राहुल बाबा (राहुल गांधी) कहते हैं कि मैं अतीत की बात क्यों करता हूं।”
उन्होंने कहा, “हमें कांग्रेस की ओर से अतीत में की गई गलतियों को याद रखना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें दोहराया न जाए.”
शाह ने कहा कि अगर कांग्रेस नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में एक भी सीट जीतती है, तो पूर्वोत्तर राज्य को एक बार फिर अस्थिरता का सामना करना पड़ेगा.
गृह मंत्री ने असम में भाजपा की ओर से शुरू की गई कई विकास परियोजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कांग्रेस राज्य की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए इस पैमाने की पहल करने की कल्पना भी नहीं कर सकती.
उन्होंने कहा, “‘पंजे’ (कांग्रेस का चुनाव चिह्न) पर एक भी वोट बर्बाद न करें। ‘कमल’ (भाजपा का चुनाव चिह्न) के पक्ष में वोट डालें.”
शाह ने कहा कि उनके हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके कारण उन्हें ग्वालपाड़ा और दुधनोई तक सड़क मार्ग से आना पड़ा, जिस दौरान रास्ते में उन्होंने असम की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव किया।
गृह मंत्री को शुक्रवार को असम में तीन चुनावी रैलियों को संबोधित करना था. हालांकि, हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी के कारण धुबरी जिले के गोलकगंज में निर्धारित उनकी पहली रैली रद्द करनी पड़ी.
दुधनोई में शाह ने ग्वालपाड़ा वेस्ट (सुरक्षित) से भाजपा उम्मीदवार पबित्रा राभा और दुधनोई (सुरक्षित) से पार्टी प्रत्याशी टंकेश्वर राभा के लिए प्रचार किया। वहीं, पलाशबाड़ी में उन्होंने पार्टी उम्मीदवार हिमांगशु बैश्य (पलाशबाड़ी) और राजू मेच (बोको-चायगांव) के पक्ष में मतदान की अपील की.
असम की 126 विधानसभा सीट के चुनाव के लिए मतदान नौ अप्रैल को होगा, जबकि मतों की गिनती चार मई को की जाएगी.


